श्री सुरेश प्रभु रेल मंत्री,आप का ध्यान इस और आकर्षित करना चाहते है हम हरदवासी।भारतीय ट्रेन मैं शौचालय को अब भली भांति जानते है, यह भी एक तरीके से खुले मैं शौच करना ही माना जाता है।
भारत के लगभग 40 परसेंट लोग रोज ट्रैन से सफर करते है,और इससे आप समझ सकते है कि हम लोगों को समझा रहे है कि खुले में शौच मुक्त हो पर हम खुद रेल विभाग सरकारी तंत्र होकर इसको नही मान रहे हैं।
बडा प्रश्न
क्या कानून सिर्फ गरीबो और किसानो और अशिक्षित लोगो के लिए ही है क्या।
क्या पूरा कानून गरीब मजदूर या अशिक्षित लोगो के लिए ही बना है ।
अगर खुले मैं शौच की मुहीम को चलाना है तो पहले ट्रेन को खुले मैं शौच से मुक्त किया जाये
येह तो वही हो रहा है की जैसे भटे जी भटे खा रहे है और दूसरे को परेज करने के बात कर रहे है।
देश को खुले मैं शौच से मुक्त करने के लिए ट्रेन को खुले मैं शौच मुक्त किया जाये
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