💯📝📝📝नेताजी आप जनता के बिना कुछ नही है,यह लेख जरूर पढे।
*जनता भगवान कृष्ण है और आप अर्जुन हो*
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*जरूर पढे*
प्रत्येक दिन अर्जुन जब युद्ध से लौटते...
श्रीकृष्ण पहले उतरते, फिर सारथी धर्म के
नाते अर्जुन को उतारते।
अंतिम दिन वे बोले- अर्जुन...
तुम पहले उतरो रथ से व थोड़ी दूर जाओ।
भगवान के उतरते ही रथ भस्म हो गया।
अर्जुन आश्चर्यचकित थे। तब भगवान बोले-
पार्थ...
तुम्हारा रथ तो कब का भस्म हो चुका था।
भीष्म, कृपाचार्य, द्रोणाचार्य व कर्ण के
दिव्यास्त्रों से यह नष्ट हो चुका था। मेरे
संकल्प ने इसे युद्ध समापन तक जीवित रखा
था।
*अपनी श्रेष्ठता के मद में चूर अर्जुन का*
*अभिमान चूर-चूर हो गया था। अपना सर्वस्व*
*त्यागकर वे प्रभू के चरणों पर नतमस्तक हो*
*गए।*
अभिमान का व्यर्थ बोझ उतारकर हल्का
महसूस कर रहे थे... गीता श्रवण के बाद इससे
बढ़कर और क्या उपदेश हो सकता था कि सब
भगवान(जनता) का किया हुआ है। आप (नेताजी) तो निमित्त मात्र
है।
काश हमारे अर्जुन(नेताजी ) इसे समझ पाय.....
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Social activist...... We the people, For the people, By the people.
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